अगर बात इस बारें में करें कि lockdown ने मानव जीवन को कैसे प्रभावित किया तो शायद यह बता पाना भी मुश्किल होगा| मेरे ख्याल से इस lockdown के कारण मानव जीवन प्रभावित नहीं हुआ बल्कि इस वजह से मानव जीवन बहुत मुश्किल में आ गया है| जिन लोगों के पास जीने के लिए कई विकल्प हैं वह लोग तो मैनेज कर सकते हैं लेकिन जिनके पास जीवन यापन करने के लिए उनके काम से अलावा कोई और विकल्प नहीं है तो उनके लिए इस lockdown में क्या सुविधा दी गई है| कुछ भी नहीं!

कहने के लिए सरकार ने जरूरतमंदों के लिए खाने की व्यवस्था की है पर क्या किसी को पता है कि जो खाना वह दे रहे हैं वह एक परिवार को पूरा हो भी रहा है या नहीं| अगर सड़कों पर जाकर देखा जाए तो लोग दोपहर के खाने एक लिए रात को ही लाइन में खड़े हो जाते हैं| दोपहर का खाना उन्हें 2 बजे मिल रहा है| रात का खाना कब मिलता होगा यह यह खुद ही सोचिये| किसी को खाना मिलता है और किसी को खाना नहीं मिलता वो क्या करें जिनके परिवार में 6 से 7 लोग हैं|

(Courtesy : Third Party) 

एक रात पहले lockdown के लिए कह दिया, कोई व्यस्व्स्था नहीं की और ना ही यह जानने की कोशिश की, कि लोग कैसे रहेंगे बिना सामान के| किसी के घर महीने भर का राशन है किसी के घर नहीं है, एक बार भी सरकार ने विचार नहीं किया बस कह दिया कि कल से lockdown है सब कुछ बंद| अगर इस बार का विचार नहीं किया कि जतना क्या खाएगी, जो रोजाना कमाने वाले हैं उनका क्या होगा| इस बारें में कोई विचार नहीं किया|

जिस तरह नोट बंदी कर दी थी, बिना कुछ सोचे समझे| तब भी लोग कितना परेशान हुए थे| कोई सरकार को यह बताए कि इनके जो भी फैसले होते हैं उनके कारण सिर्फ गरीब लोग ही परेशान होते हैं बाकि किसी का कुछ  नहीं जाता| 

अगर कोई पूछे कि इतना कुछ कह रहे हैं कि गरीबों को पैसे दिए, तो क्यों खान बांटने की लाइन में लोग दिन रात खड़े हैं| जब लोगों के घरो में राशन दिया जा रहा है तो वो लोग कौन है जो दोपहर के खाने के इंतज़ार रात भर से करते हैं| न्यूज़ चैनल वाले इस खबर को दिखा रहे हैं कि किनको खाना दिया, लेकिन उनका क्या जो कोरोना से तो नहीं लेकिन इस lockdown में भूख से जरुर दुखी हो गए होंगे|