जिंदगी
, एक ऐसा नाम है जिसमें आपका वर्तमान से लेकर भविष्य तक का पूरा सफ़र होता है | इसमें
आपका अच्छा-बुरा, सही-ग़लत , उतार-चढ़ाव और कुछ उलझनों के साथ समय बीत ही जाता है |
कुछ लोग अपना हर वक़्त ख़ुशी के साथ जीते हैं और कुछ अपना हर वक़्त दुःख के साथ रहते
हैं पर अपना जीवन सभी जीते हैं |
जिंदगी
में उलझनें क्यों होती हैं ?
जब
इन्सान जन्म लेता है तब उसके जन्म के साथ ही उलझने शुरू हो जाती हैं | जैसे ही
उसका जन्म होता है तो कई सारे ऐसे रिश्ते होते हैं जिनमें वो जन्म लेते ही घिर
जाता है | उसको तब भी अपने रिश्ते चुनने की आज़ादी नहीं होती है |
जब
बच्चा थोड़ा बड़ा होता है तो कुछ शिक्षा उसको माँ –पिता से मिलती है , जिसमें उसको
अपने परिवार के सदस्यों और जानने वालों के बारें में पता चलता है कि उन सभी अनजान
लोगों से उसका रिश्ता क्या है | तब माँ ने कह दिया ये मामा है, ये चाचा है , ये
बुआ है या ये मासी है | बस हो गया ,बचपन से रिश्ते निभाने की आदत डलवाई जाती है |
बड़ों
के पैर छूने चाहिए , छोटो से प्यार से बात करना चाहिए | इन सब बातों को लेकर बड़े
हुए और दिमाग में यही एक उलझन कि कोई बड़ा दिखेगा तो उसके पैर छुओ उसका सम्मान करो
|
कई
बार तो ऐसा होता है जो इंसान हमें पसंद नहीं होता उससे भी बात करना होता है और
उसका भी सम्मान करना होता है | इसको कहते हैं जिंदगी की एक उलझन जिसमें ना चाहते
हुए भी ऐसे काम करने होते हैं जो पसंद ना हो |
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| (Courtesy : Google Third Party) |
कहते
हैं ना :
जब
जिंदगी खुद के हिसाब से नहीं बल्कि औरो से हिसाब से जीना पड़े
तो
ये होती है उलझन
जब
खुद के लिए फैसले सही होकर भी हमें अपनों के सामने गलत लगे
तो
ये होती है उलझन
जिस
वक़्त अपनों के साथ ही जरूरत हो और अपने हाथ पीछे खींच लें
तो
ये होती उलझन
किसी का साथ होकर भी जब अकेले चलने पर मजबूर हो
जाएं
तो
ये होती है उलझन
इन
सभी परेशानियों में होकर भी कोई अपनी जिंदगी खुश होकर जीता है तो भी उसको जीने
सिर्फ लोगों की बातें सुनने मिलती है | सोचो इन्सान करें तो क्या करें , जीए तो
कैसे जीए | क्योंकि दुखी रहे तो हमें परेशानी और खुश रहे तो औरों को | अब इस उलझन
का कोई उपाय तो बताए की क्या करें और क्या ना करें |
इंसान
के जन्म से लेकर उसके मरने तक सिर्फ समस्याओं में घिरा रहता है | वो अपना काम अपने
हिसाब से नहीं कर सकता |
कभी
ऐसा लगता है कि हम बड़े ही नहीं हुए क्योंकि आज भी हम अपने फैसले खुद नहीं ले सकते |
“इन
उलझनों से कैसे दूर हुआ जाए कोई बता दें ज़रा, हम कैसे अपनी जिंदगी को जीयें कोई
समझ दे ज़रा
हर
वक़्त किसी की गुलामी तो नहीं कर सकते , ना ही हर किसी को खुश रख सकते हैं,
बस
जीने के कुछ सूकून के कुछ पल मांगते हैं, कोई हमें वो वक़्त दे दे ज़रा”

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